राजनीति से नहीं बल्कि शिक्षा से ही संभव है क्रांतिकारी बदलाव :- डॉ. राघव प्रकाश - RPSC के पूर्व अध्यक्ष BM Sharma और विभिन्न विश्वविद्यालयों के 3 पूर्व कुपतियों सहित कई विद्वानों ने विमर्श के दौरान की पुस्तक की सराहना
'सृजनात्मक शिक्षा' पुस्तक का विमोचन और विमर्श
डॉ. राघव प्रकाश और प्रो. सविता पाईवाल ने लिखी है पुस्तक
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव को लेकर दिए गए हैं सारगर्भित सुझाव
लेखक का उद्देश्य - शिक्षा बदलो, दुनिया बदलो,
अच्छी शिक्षा वही है जो राजनीति से मुक्त हो :- डॉ. राघव प्रकाश
जयपुर। हिंदी के विद्वान और वरिष्ठ लेखक डॉ. राघव प्रकाश का कहना है कि आज जिसे हम 'प्रगतिशील शिक्षा' मान रहे हैं, वास्तव में वह मनुष्य को उसकी जड़ों से काटकर एक मशीन का पुर्जा बनाने की प्रक्रिया मात्र है। अच्छी शिक्षा की विशेषता यह है कि वह राजनीति से मुक्त होनी चाहिए तभी शिक्षा के उद्देश्य की पूर्ति हो पाएगी। विख्यात शिक्षाविद डॉ राघव प्रकाश और उनकी पत्नी प्रो. सविता पाईवाल ने शिक्षा में बदलाव की जरूरत की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए एक पुस्तक लिखी है जिसका नाम है 'सृजनात्मक शिक्षा'। मानसरोवर स्थित आचार्य हस्ती ऑडिटोरियम में इस पुस्तक का विमोचन किया गया।
3 विश्वविद्यालयों के पूर्व कुलपति, दूरदर्शन के पूर्व अतिरिक्त निदेशक, RPSC के पूर्व चेयरमैन सहित कई दिग्गज विद्वानों ने की सराहना
इस दौरान डॉ. राघव प्रकाश ने कहा कि शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है जिसके बूते इस दुनिया में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है। विमोचन के दौरान इस पुस्तक पर कई विद्वानों ने विमर्श भी किया। इनमें राजस्थान लोकसेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर बीएम शर्मा, जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर और यूपीएससी के पूर्व सदस्य प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल, वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा के पूर्व कुलपति प्रोफेसर नरेश दाधीच, हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर ओम थानवी, राजस्थान साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर हेतु भारद्वाज, दूरदर्शन के पूर्व अतिरिक्त निदेशक नंद भारद्वाज, राजकमल प्रकाशन के संचालक अशोक माहेश्वरी, शिक्षाविद और लेखक राजेंद्र मोहन शर्मा, पूर्व आईएएस जगरूप यादव, वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र छाबड़ा और प्रख्यात कवि संपत सरल सहित कई गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
जानिये क्यों जरूरत है ऐसी पुस्तक की
अपनी पुस्तक पर चर्चा करते हुए डॉ. राघव प्रकाश ने कहा कि बदलते सामाजिक एवं शैक्षणिक परिवेश में सीखने सिखाने के नवाचारों, विधियों एवं प्रणालियों के विश्वस्तरीय शोधों के आधार पर इस पुस्तक का लेखन किया गया। शिक्षा बदलो, दुनिया बदलो के उद्देश्य से इस पुस्तक को लिखा गया है क्योंकि राजनीति से बदलाव संभव नहीं है। जरूरत के मुताबिक यह बदलाव केवल शिक्षा से ही लाया जा सकता है।
शिक्षक ठान ते तो असंभव कुछ भी नहीं
प्रो. सविता पाईवाल ने कहा कि दुनिया का हर बालक शिक्षा से होकर गुजरता है। इसलिए सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय और शिक्षक अगर यह तय कर लें कि हमें हमारे बच्चों को अच्छी तरह से पढ़ाना है तो वे पूरी दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अच्छी शिक्षा देकर वे उनमें राजनीतिक विवेक ला सकते हैं ताकि अच्छी सरकार बनें। आर्थिक विवेक लाया सकते हैं ताकि नागरिक अच्छा बिजनेस कर सके। प्रो. पाईवाल ने कहा कि अच्छी शिक्षा से ही बालक बड़ा होकर संस्कारित और गुणवान नागरिक बन सकता है। इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है।
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