जयपुर में NSUI और पुलिस में टकराव, विरोध प्रदर्शन के बाद छात्र नेताओं को जबरन उठाया, यूनिवर्सिटी कैंपस में हो रहे कार्यक्रम का क्यों किया गया विरोध - भाजपा और कांग्रेस नेताओं ने कही अपनी अपनी बात, पढें पूरी खबर
जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। यूनिवर्सिटी कैंपस में आयोजित एक कार्यक्रम के विरोध में एनएसयूआई के नेता और कार्यकर्ता एकजुट हुए। पहले धरना और नारेबाजी चलती रही लेकिन बाद में जब बेरिकेड्स लांघने की कोशिश की गई तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने बैरिकेडिंग की लेकिन कार्यक्रम का विरोध करने आए एनएसयूआई के छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स हटाने की कोशिश की। ऐसे में पुलिस ने छात्र नेताओं को हिरासत में लेते हुए उन्हें उठाकर पुलिस वेन में धकेल दिया।
धक्का मुक्की हुई तो उठाकर पुलिस वेन में बैठाया
कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही एनएसयूआई के छात्र नेता और कार्यकर्ता कैंपस में जुट गए। पुलिस ने उन्हे चेताया कि वे किसी भी कार्यक्रम में दखल या विघ्न ना डालें। कुछ देर तक को नारेबाजी चलती रही लेकिन बाद छात्र नेता और कार्यकर्ता पुलिस से उलझने लगे। जब हंगामा ज्यादा बढ़ने लगा और धक्का मुक्की होने लगी तो पुलिस ने एनएसयूआई के छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने शुरू किया। करीब 15 मिनट के प्रयास में एक एक कर दर्जनभर कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। इस दौरान छात्र नेता नारेबाजी करते रहे।
संघ की विचारधारा से जुड़े कार्यक्रम का विरोध
दरअसल राजस्थान यूनिवर्सिटी कैंपस में स्थित मानविकी पीठ सभागार में मरुधरा नारी संगठन के बैनर तले शुक्रवार दोपहर को विचार गोष्ठी का आयोजन होना था। महिला सशक्तिकरण पर आयोजित इस कार्यक्रम का नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया यानी NSUI कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। NSUI से जुड़े छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा का है। इस कार्यक्रम को आरएसएस का कार्यक्रम बताते हुए इसका भारी विरोध किया गया। एनएसयूआई का आरोप है कि विश्वविद्यालय परिसर में इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए विशेष विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो शैक्षणिक माहौल के अनुकूल नहीं है। उधर ABVP से जुड़े छात्र नेताओं का कहना है कि यह कार्यक्रम महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण विषयों पर आधारित है। महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित कार्यक्रमों का विरोध करना उचित नहीं है।
वैचारिक दिवालियापन के दौर से गुजर रही कांग्रेस - मदन राठौड़
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी आज वैचारिक दिवालियापन के दौर से गुजर रही है, जिसका एकमात्र उद्देश्य केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रमों का विरोध करना है। इसी मानसिकता के चलते विश्वविद्यालय परिसर में मरुधरा नारी संगठन द्वारा आयोजित एक सामान्य कार्यक्रम का भी एनएसयूआई के कुछ नेता विरोध करने पहुंच गए।
कांग्रेस के नेताओं ने उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान विश्वविद्यालय में RSS की विचारधारा थोपने और शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता को कमजोर करने के खिलाफ NSUI का शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक है। ऐसे विरोध को दबाने के लिए NSUI के नेताओं व कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी भाजपा सरकार की बौखलाहट और तानाशाही मानसिकता को दर्शाती है। लोकतंत्र में असहमति और विरोध हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। इसे कुचलना संविधान की भावना के विपरीत है। राज्य सरकार इस मामले में त्वरित संज्ञान लेकर सभी गिरफ्तार NSUI कार्यकर्ताओं और नेताओं को अविलंब रिहा करे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि राजस्थान विश्वविद्यालय में RSS के राजनीतिक एजेंडे के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज़ उठाने वाले NSUI कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज और उन्हें गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेना सत्ता का खुला दुरुपयोग है। क्या देश में शांतिपूर्ण विरोध भी अपराध बन गया है? लोकतंत्र में असहमति दबाने की नहीं, सुनने की परंपरा होती है। लेकिन भाजपा सरकार शिक्षा के मंदिरों को भी अपनी तानाशाही, और नफरत की राजनीति का अखाड़ा बनाना चाहती है। NSUI के युवाओं पर हुई ज्यादती निंदनीय और शर्मनाक है। युवाओं की आवाज़ दबाकर सरकार डराना चाहती है। मेरी सरकार से मांग है कि हिरासत में लिए गए सभी युवाओं को तत्काल रिहा करे, वरना ये आवाज़ और बुलंद होगी।
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