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ट्रम्प की पहल पर ईरान का पलटवार – ‘पहले नुकसान भरो, फिर बात - अमेरिका, इजरायल व ईरान में टकराव के बीच सीजफायर डील अटकी

ट्रम्प की पहल पर ईरान का पलटवार – ‘पहले नुकसान भरो, फिर बात

ईरान। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर बातचीत की कोशिशें तेज हो गई हैं। डोनाल्ड ट्रम्प की टीम ईरान के साथ सीजफायर पर बातचीत करना चाहती है। इस प्रक्रिया में उनके सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यह जानकारी Axios की रिपोर्ट में सामने आई है।

हालांकि, ईरान ने बातचीत के लिए कड़ी शर्तें रखी हैं। ईरान का कहना है कि सबसे पहले युद्ध रोका जाए, उसे हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए और भविष्य में उस पर दोबारा हमला नहीं होने की पक्की गारंटी दी जाए।

वहीं दूसरी तरफ, ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि अमेरिका फिलहाल ईरान की सभी शर्तें मानने के लिए तैयार नहीं है, खासकर मुआवजे की मांग को लेकर। दोनों देशों के बीच सीधे तौर पर बातचीत नहीं हो रही है, लेकिन मिस्र, कतर और ब्रिटेन जैसे देश इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

अमेरिका की मांग है कि ईरान अपने मिसाइल प्रोग्राम को अस्थायी रूप से बंद करे, यूरेनियम एनरिचमेंट रोके और अपने परमाणु ठिकानों को भी निष्क्रिय करे। इसके अलावा, अमेरिका चाहता है कि ईरान हिजबुल्लाह और हमास को आर्थिक मदद देना भी बंद करे।

 BRICS से ईरान की अपील: “हमलों को रोकने में निभाएं बड़ी भूमिका”

इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूज पजशकियान ने शनिवार को नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि BRICS देशों को ईरान पर हो रहे हमलों को रोकने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि BRICS को बिना किसी बाहरी दबाव के, स्वतंत्र रूप से इस मामले में आगे आना चाहिए। ईरान के राष्ट्रपति ने यह भी सुझाव दिया कि मिडिल ईस्ट के देश मिलकर एक नया क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्र बनाएं। उनका मानना है कि इससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम रहेगी और बाहरी देशों का हस्तक्षेप कम होगा। सीजफायर की कोशिशों के बीच दोनों पक्षों की शर्तें अभी भी टकराव की स्थिति में हैं। जहां अमेरिका अपनी रणनीतिक मांगों पर अड़ा है, वहीं ईरान सुरक्षा और मुआवजे की गारंटी चाहता है। ऐसे में मध्यस्थ देशों और BRICS की भूमिका आने वाले दिनों में बेहद अहम हो सकती है। ( साभार - डीबी )

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